सफर


सूरज धीरे-धीरे अपने अस्त होने की ओर बढ़ रहा था, और मुंबई से पुणे की हाईवे पर सुनहरी-नारंगी रोशनी सड़क और पेड़ों पर फैली थी, जैसे दुनिया किसी अजीब आग की चपेट में हो। रिया और आरव अपनी कार में हवा को चीरते हुए तेज़ी से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे सूरज ढल रहा था, आसमान का रंग धीरे-धीरे गहरा होता जा रहा था, और पेड़ों की छायाएँ लंबी और हिचकोले लेने लगी थीं। यह उनकी जिंदगी की सबसे यादगार रोड ट्रिप थी—देश की रंग-बिरंगी संस्कृति और नजारों के बीच, सड़क किनारे ढाबों की अजीब खुशबू, कभी-कभी सुनाई देती हवा में फुसफुसाहट, और हंसी-मजाक के साथ डर की हल्की सनसनी। सफर का अंतिम पड़ाव था गोवा—जहाँ समुद्र की ठंडी लहरें में पैरों को डुबों और बियर पीते पीते सूरज को ढलते देखने का उनका प्लान था। 

उन्होंने अपनी सारी जरूरतें कार में समेट ली थीं—नाश्ते का छोटा बैग, पसंदीदा गानों की रोमांचक प्लेलिस्ट, और एक साहसिक उत्साह जो हर मील के साथ बढ़ रहा था। कार मस्ती में अपनी तेज़ रफ़्तार में हाईवे पर चल रही थी, और मील दर मील सड़क के टायरों के नीचे पीछे छूटते जा रहे थे।

लेकिन जैसे ही शाम ने अपना जादू फैलाना शुरू किया, उनके बीच एक अजीब, खामोश तनाव फैल गया। रात के उतरते ही, सड़क और उसके आस-पास की दुनिया एक अजीब, रहस्यमय अंधेरे में बदलने लगी। आगे की सड़क बिल्कुल वैसी ही दिख रही थी, मानो समय वहीं थम गया हो। पेड़ और बाँस के झुरमुट धुंधले और तेज़ी से गुजर रहे थे, और सड़क किनारे लगे साइन बोर्ड अजीब तरह से पहले देखे हुए लग रहे थे—जैसे कोई छाया उनके पीछे पीछा कर रही हो।

“मैं कसम खाती हूँ, यह ढाबा हमने पहले भी देखा है,” रिया ने कहा, उसकी आवाज़ में घबराहट और रहस्यमय तनाव झलक रहा था, आँखें झिलमिलाते नीयॉन साइन की ओर टिकी हुई थीं। वह जैसे उस झिलमिलाती रोशनी में कोई छाया देख रही हो।

आरव ने पीछे झाँक कर देखा, उसकी भौंहें तनी हुई। “नहीं, यह मीलों पहले था। हम घंटों से इसी सड़क पर हैं… कुछ भी बदलना चाहिए था, लेकिन सब वैसा ही है। आरव ने कहा

रिया अपनी सीट में झुक गई, होंठ कुतरते हुए। उसके दिल में एक अजीब, ठंडी सनसनी दौड़ रही थी। रिया ने कहा “हमें पेट्रोल पंप पर रुकना चाहिए… थोड़ा फ्रेश हो जाना चाहिए शायद ये सफर या फिर यह जगह हमारे दिमाग को बहका रही हो?” उसकी आँखों में डर और उलझन साफ झलक रही थी।

आरव ने धीरे-धीरे सिर हिलाया और कार को अगले एक्सिट पर मोड़कर पुराने, सुनसान पेट्रोल पंप की ओर ले गया। यह जगह जर्जर और वीरान लग रही थी—बोर्ड का पेंट उड़ चुका था, पंप के ऊपर झिलमिलाती फीकी लाइटें अस्थिर चमक रही थीं, जैसे हर पल बुझने वाली हों। दरवाजे के पास अकेला अटेंडेंट खड़ा था, उसकी नजरें कहीं दूर, अंधेरी सड़क के किनारे टिक गई थीं, और उसके चेहरे पर अजीब, समझ से परे खालीपन झलक रहा था। आरव ने टैंक भरना शुरू किया, और रिया चुपचाप छोटे, धुँधले स्टोर की ओर बढ़ी, उसकी कदमों की हर आवाज़ उस खामोश, भयावह माहौल में अनजाने साए की तरह गूंज रही थी।

दरवाजे की घंटी एक लंबी, अनकही गूँज के साथ बजी, और रिया धीरे-धीरे काउंटर की ओर बढ़ी। काउंटर पर खड़े—मध्यम आयु का आदमी, जुर्राबे-सफेद बालों वाला—उसकी ओर एक तिरछी, अजीब मुस्कान के साथ देखा। उसका चेहरा असामान्य लग रहा था, जैसे कोई धुंधली छवि किसी पुराने, खराब टीवी पर हिचकिचा रही हो। उसकी आंखें रिया पर टिक गईं, उसकी मुर्दा आँखों में, केवल खालीपन और अजीब ठंडक थी। रिया की साँस तेज़ हो गई; उसने पलकों को झपकाया और नजरें फेर लीं, लेकिन दिल की बेचैनी और गहरा गई, जैसे कोई अदृश्य हाथ उसके भीतर घुस रहा हो। स्टोर की हर छाया अचानक गहरी और असामान्य रूप से लंबी लगने लगी, और रिया को लगा कि चारों तरफ़ सब कुछ—दीवारें, शेल्फ़, और हवा में लटकते सामान—जैसे उसकी निगाहों से छिपकर उसे देख रहे हों।

“क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूँ?” स्टोर क्लर्क ने पूछा, उसकी आवाज़ धीमी, खोखली और विकृत लग रही थी, जैसे किसी वीरान सुरंग से बाहर आती गूँज। हर शब्द में एक अजीब ठंडक और अनसुलझा खौफ था।

“बस ये…” रिया ने बुदबुदाया, हाथ कांपते हुए चिप्स का पैकेट काउंटर पर रखते हुए। वह उसकी ओर फिर देखने की हिम्मत जुटा रही थी, लेकिन इस बार क्लर्क का चेहरा पहले से भी अधिक असामान्य और धुंधला दिखा—मानो किसी बुरे सपने की धुंधली छवि जीवित हो गई हो। उसने अपनी आँखें रगड़ी, उम्मीद में कि यह केवल उसकी कल्पना है, लेकिन जैसे ही उसने फिर देखा, क्लर्क की हर विशेषता बदल चुकी थी—नाक टेढ़ी, मुंह विकृत, और उसकी आँखों में एक गहरी, खाली खामोशी छा गई थी, जो सीधे रिया के मन में डर के बीज बो रही थी।

रीया का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसका हाथ काँप रहे था, वह पैसे रखकर अपने सामान को झटपट उठाने पर मजबूर हो गई। जैसे ही उसने दरवाजे की ओर कदम बढ़ाए, उसे लगा कि हवा में कुछ अजीब सा सरसराहट है, जैसे कोई अदृश्य साया उसके पीछे हिल रहा हो। वह तेजी से बाहर निकली, लेकिन उसके कदमों की हर आवाज़ उस खाली, डरावनी जगह में अनजाने शोर की तरह गूंज रही थी।

आरव पहले से ही कार में बैठा इंतजार कर रहा था, उसकी आँखें भय और आश्चर्य से चौड़ी हो गई थीं। “तुम विश्वास नहीं करोगी,” उसने धीरे-धीरे सिर हिलाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में हल्की घबराहट थी। “मैंने अटेंडेंट से बातचीत की, लेकिन कुछ अजीब था… ऐसा लग रहा था जैसे वह बार-बार वही बात दोहरा रहा हो, एक टूटी हुई रिकॉर्ड की तरह, और हर बार शब्द कुछ और रहस्यमय अर्थ लिए हुए लग रहे थे।”

रिया सीट पर झुककर बैठी थी, उसके हाथ अब भी हल्के - हलके काँप रहे थे। उसके दिल की धड़कन तेजी से बढ़ रही थी, और उसकी निगाहें डर के मिश्रित तनाव से चारों ओर फैलती सड़क को निहार रही थीं। “कुछ तो गड़बड़ है, आरव,” उसने फुसफुसाया, आवाज़ में घबराहट झलक रही थी। “चलो… बस यहाँ से निकलते हैं, और जितनी जल्दी हो सके आगे बढ़ते हैं।”

वे कार की रफ़्तार बढ़ाते हुए उस भुतहे-से पेट्रोल पंप को पीछे छोड़ गए। लेकिन जैसे-जैसे सड़क आगे बढ़ती गई, माहौल और भी अस्वाभाविक होता चला गया। कार के अंदर अजीब-सा भारीपन भर गया था, मानो हवा अचानक ठंडी और बोझिल हो गई हो। रात अब पूरी तरह उतर चुकी थी, और सड़क दोनों ओर से घने पेड़ों की परछाइयों में डूबी थी। पेड़ों की शाखाएँ ऐसे झूल रही थीं मानो उनकी मुड़ी-तुड़ी उंगलियाँ कार को पकड़ने की कोशिश कर रही हों।

रिया बेचैनी में रेडियो घुमाने लगी, लेकिन हर चैनल पर सिर्फ एक ही अजीब बात हुई—हर जगह वही पुराना गीत बज रहा था। गाना टूटी-फूटी आवाज़ में बजता, जैसे कोई पुरानी ग्रामोफोन रिकॉर्ड धीरे-धीरे खत्म हो रही हो। बीच-बीच में रेडियो पर किसी के फुसफुसाने जैसी आवाज़ें आतीं, मानो कोई उनके नाम पुकार रहा हो।

कार को चलते हुए घंटों बीत चुके थे दोनों को ऐसा ही लग रहा था। घड़ी की सुइयाँ मानो रुक गई थीं, और सड़क अनंत अंधकार में एक ही दिशा में खिंचती चली जा रही थी—बिना किसी मोड़, बिना किसी बदलाव के। ऐसा लगता था जैसे वे किसी अनदेखे चक्र में फँस गए हों।

और तभी, सामने चमकते नीयॉन साइन ने उनका खून जमा दिया।

“वो… वो ढाबा…” रिया की आवाज़ डर से काँप उठी। उसकी आँखें चौड़ी थीं, और होंठ सूख चुके थे। “यह वही है। वही जगह। हमने इसे पहले भी देखा था।”

आरव के हाथ स्टीयरिंग पर और कस गए। उसकी हथेलियाँ पसीने से भीग चुकी थीं। उसने गहरी साँस ली, लेकिन आवाज़ मुश्किल से बाहर निकली।

“नहीं… यह नामुमकिन है। हम लगातार सीधे ही चल रहे थे। हमने कोई टर्न नहीं लिया और न ही पीछे मुड़े।”

लेकिन उसके शब्द उतने ही खोखले लग रहे थे जितना उस वीरान हाईवे का अंतहीन अंधकार।

जैसे ही कार उस ढाबे के पास से गुज़री, रिया की साँस थम गई। उसकी आँखें खिड़की पर जमी रह गईं।

आरव ने ढाबे पर जिसे उसने पहले देखा था, उसे लगा की वहाँ कोई बैठा है।

उसने एक और रिया को बैठे देखा। वही चेहरे की बनावट, वही बाल, वही कपड़े… बस फर्क इतना था कि उसकी आँखें बुझी हुई और काली थीं, जैसे उनमें कोई जीवन बाकी न हो।

उसके सामने बैठा था एक आदमी—आरव की हूबहू परछाईं। लेकिन उसका चेहरा हल्का-सा टेढ़ा था, होंठ अजीब-सी मुस्कान में खिंचे हुए, और उसकी आँखें सीधे कार की खिड़की से आर-पार झांक रही थीं।

ये सब देख रिया का गला सूख गया। उसने कांपती उंगलियों से आरव का हाथ पकड़ लिया।

“आरव…” उसकी आवाज़ बमुश्किल फुसफुसाहट थी। “वो… वो हम हैं। बैठे हुए।”

आरव ने घबराकर कार रोकी, और उसके माथे पर ठंडा पसीना छलक आया। ढाबे पर बैठे दोनों चेहरों ने एक साथ उनकी ओर देखा—और उसी पल ढाबे की सारी लाइट्स बुझ गईं, मानो किसी ने अंधेरे का पर्दा गिरा दिया हो।

"निकालो यहाँ से आरव" रिया ने काँपते हुए कहा। आरव ने कार स्टार्ट की और बेहताशा रफ़्तार से खाली सड़क पर भगाये जा रहा था। पर यह क्या फिर से वही ढाबा

“कार रोको!” रिया की आवाज़ चीख में बदल गई। “आरव, कार अभी रोको!”

आरव ने झटके से ब्रेक दबाए। टायरों की तीखी चीख सुनसान हाईवे पर गूँज उठी, जैसे किसी जानवर की आखिरी कराह। कार एकदम रुक गई। दोनों की साँसें तेज़ थीं, और खिड़की से बाहर झाँकते ही उनका खून तेज़ी से जमने लगा। 

ढाबे पर… उनकी ही प्रतिबिंब जैसी परछाइयाँ बैठी थीं—हँस रही थीं, कप उठाकर चाय पी रही थीं, जैसे किसी साधारण शाम का आनंद ले रही हों। उनके चेहरों पर वही हाव-भाव, वही मुस्कान… लेकिन उनकी आँखें शून्य थीं, काली और गहरी, जैसे किसी अंधेरी खाई की गहराई।

रिया की उंगलियाँ काँप रही थीं, सीट को कसकर पकड़ते हुए।

“यह क्या हो रहा है?” आरव की आवाज़ बमुश्किल सुनाई दी, मानो गला घुट गया हो।

रिया ने सिर हिलाया, आँखों में डर का तूफ़ान उमड़ रहा था।

हर बार हम गुजरते हैं, वो हमशक्ल और भी ज़िंदा, और भी डरावने हो जाते हैं।”

कार की हेडलाइट्स टिमटिमाईं, और अगले ही पल काँच के शीशे पर धुंधली परछाइयाँ उभर आईं—मानो वे हमशक्ल उनकी कार की ओर बढ़ रहे हों।

आरव ने रिया की ओर देखा, उसका चेहरा राख की तरह पीला पड़ चुका था। आवाज़ में हड़बड़ी थी—

“हमें चलते रहना होगा, रिया। कोई न कोई रास्ता तो होगा… हमें इससे बाहर निकलना ही होगा।”

आरव ने कार स्टार्ट की, इस बार और तेज़ी से, मानो स्पीड ही इस बुरे सपने को तोड़ सकती है। इंजन की घरघराहट और टायरों की गड़गड़ाहट सुनसान रात में गूँज रही थी। पर जैसे-जैसे वे आगे बढ़े, आसपास की दुनिया और ज़्यादा भयानक होती चली गई।

वही टेढ़े मेढ़े पेड़ बार-बार उनकी नज़रों के सामने आते रहे, मानो रास्ता खुद उन्हें मज़ाक में घुमा रहा हो। वही पुराना, टूटा-फूटा बिलबोर्ड—जिस पर अब अक्षर खून जैसे लाल धब्बों में टपकते दिख रहे थे—हर कुछ दूरी पर दोहराता रहा। और फिर, सबसे डरावना… वही जर्जर पेट्रोल पंप, झिलमिलाती लाइट और खाली आँखों वाले अटेंडेंट के साथ, उनकी कार की खिड़की से फिर सामने आ खड़ा हुआ।

रिया ने काँपते हुए फुसफुसाया,

“ये सड़क हमें कहीं ले ही नहीं जा रही… ये सड़क हमें निगल रही है। बार बार हम उसी जगह पर क्यों पहुँच जा रहे है”

कार की हेडलाइट्स ने धुंध को चीरने की कोशिश की, लेकिन धुंध और भी गहरी होती गई। ऐसा लग रहा था जैसे समय खुद मुड़कर उनके चारों ओर लिपट रहा हो, उन्हें बार-बार उसी डरावने बिंदु पर वापस फेंक रहा हो।

फिर वे आवाज़ें उभरीं।

पहले तो हल्की फुसफुसाहट, जैसे किसी ने उनके कानों के बिलकुल पास साँस छोड़ी हो। लेकिन धीरे-धीरे वह फुसफुसाहट शब्दों में बदलने लगी—उनकी ही अपनी बातचीत के टुकड़े, बिगड़े हुए, टूटी-फूटी और अनुक्रम से बाहर, मानो किसी अदृश्य दानव ने उनकी यादों को तोड़-मरोड़कर लौटा दिया हो।

“…पेट्रोल पंप… रुको मत… कुछ… गलत… है…”

रिया का चेहरा सुन्न पड़ गया। उसकी साँसें थम गईं। “आरव…” उसने काँपती आवाज़ में कहा, दिल पसलियों से टकराता हुआ। “क्या तुम ये सुन रहे हो?”

“हाँ… सुन रहा हूँ।” आरव की उंगलियाँ स्टीयरिंग पर सफ़ेद हो गईं, जैसे वह अपनी आखिरी ताक़त से पकड़ बनाए हो। उसकी आँखें डरी हुई चिड़िया की तरह इधर-उधर डोल रही थीं, हर परछाईं में खतरा तलाशते हुए।

जैसे-जैसे उनकी कार आगे बढ़ी, आसपास की दुनिया किसी डरावने सपने में बदलने लगी। सड़क की लाइटें अनियमित रूप से झिलमिलाने लगीं, और उनके नीचे की परछाइयाँ लंबी होकर कार के करीब सरकतीं, जैसे अदृश्य हाथ उन्हें पकड़ने के लिए बढ़ रहे हों। हवा ठंडी थी, लेकिन कार के भीतर पसीने की गंध भारी हो चुकी थी।

ऊपर आसमान में चाँद और भी अजनबी लगने लगा—बड़ा, अस्वाभाविक रूप से करीब, और अब पूरी तरह खून-लाल। उसकी रोशनी में पूरी सड़क डूब गई, मानो कोई प्राचीन बलिदान वेदी की ओर खींच रही हो।

“रिया…” आरव की आवाज़ थरथरा रही थी। “मुझे लग रहा है हम चक्कर काट रहे हैं। हर मोड़, हर निशान हमें फिर उसी जगह फेंक देता है। हमें… हमें किसी तरह इस सड़क से बाहर निकलना होगा, वरना…”

उसकी बात अधूरी रह गई, क्योंकि अचानक पीछे की सीट से वही फुसफुसाहट दोबारा गूँज उठी—इस बार और पास से। 

हर बार जब वे किसी एक्सिट की कोशिश करते, सड़क अपने आप मुड़कर उन्हें उसी दिशा में ले आती। हर प्रयास उन्हें वही सुनसान सड़क, वही लैंडमार्क, वही डरावना पेट्रोल पंप और ढाबे में वापस लाता।

हर बार आरव कार की स्पीड बढ़ा देता लेकिन सब बेकार। 

इस बार आरव ने बेतहाशा स्टीयरिंग मोड़ा, उसके हाथ काँप रहे थे, पर स्टीयरिंग मानो किसी और के क़ब्ज़े में था—जिद्दी और जकड़ा हुआ। उसकी आँखों में दहशत तैर आई, लेकिन कार उसकी बात नहीं मान रही थी।

रिया का गला फाड़ देने वाली चीख अंधेरे में गूँज गूँज उठी, जब टायरों ने डामर पर अपनी आख़िरी चीख निकाली। गाड़ी बेकाबू होकर फिसलने लगी—कभी बाईं तरफ़ लहराती, कभी दाईं तरफ़ झटके खाती—मानो उसे किसी अदृश्य हाथ ने धक्का देकर खिलौने की तरह उछाला हो।

और फिर… वह किसी अज्ञात, अदृश्य चीज़ से जा टकराई। टक्कर इतनी भयानक थी कि चारों ओर हवा थर्रा उठी। शीशों के टूटने की जगह, कार के चारों ओर एक भयानक गूँज फैल गई—जैसे असंख्य आवाज़ें एक साथ चीख उठी हों।

अगले ही पल सब कुछ काला हो गया।

जब रिया को होश आया..

रिया की पलकों ने धीरे-धीरे कांपते हुए खुलना शुरू किया। धुंधली नज़र के बीच उसने महसूस किया कि वह अब भी कार की सीट पर ही थी। उसके सीने में दिल ऐसे धड़क रहा था जैसे किसी पिंजरे में कैद पक्षी बाहर निकलने के लिए तड़प रहा हो। साँस लेना मुश्किल हो रहा था, हर साँस भारी और टूटी-फूटी।

उसने सिर मोड़ा तो आरव नज़र आया—उसका चेहरा पसीने से भीगा, छाती तेज़ी से उठ-गिर रही थी, लेकिन वह ज़िंदा था। उसकी आँखें बंद थीं, होंठों से दबा हुआ कराह निकल रहा था।

रिया ने आरव की ओर देखा। उसकी आँखें आतंक से चौड़ी थीं, और आवाज़ काँप रही थी—

“अभी क्या हुआ था?”

आरव ने गहरी, टूटी हुई साँस ली। उसकी आवाज़ खराश से भरी थी, जैसे गले में कोई चाकू अटका हो।

“मैं… मैं नहीं जानता। लेकिन… ऐसा लग रहा है जैसे हम… क्रैश हो चुके हैं हमारा एक्सीडेंट हो गया था, पर सब ठीक है ऐसा लग रहा है कुछ भी नहीं हुआ पर कुछ तो बदल गया है।"

कार शांत खड़ी थी, मानो कभी हिली ही न हो। काँच पर एक भी दरार नहीं, टायर सही-सलामत, बोनट बिल्कुल ठीक। ऐसा लग रहा था जैसे एक्सीडेंट हुआ ही न हो—लेकिन हवा में बारूद जैसी जली हुई गंध तैर रही थी, और कार के अंदरूनी हिस्सों पर हल्की कालिख जमी हुई थी।

रिया का दिल और तेज़ धड़क उठा। सब कुछ सही दिखने के बावजूद रिया को महसूस हुआ की, इस सन्नाटे में कुछ गड़बड़ जरूर है।

सब कुछ बदल चुका था। हवा अब सिर्फ़ भारी नहीं, बल्कि दम घोंटने वाली लग रही थी, मानो किसी अदृश्य बोझ ने पूरे माहौल को दबा दिया हो। साँस लेना मुश्किल हो गया था। बाहर झाँकते ही रिया का खून जम गया।

आसमान में अब रात जैसा साधारण अंधेरा नहीं था; वह और गाढ़ा, अस्वाभाविक रूप से काला था, जैसे किसी ने तारों और चाँद को निगल लिया हो। बीच-बीच में आसमान पर लालिमा की हल्की लकीरें चमकतीं और तुरंत गायब हो जातीं, मानो दूर कहीं आग भड़क रही हो।

सड़क के किनारे खड़े पेड़ भी अब पेड़ नहीं लग रहे थे। उनकी टेढ़ी-मेढ़ी डालियाँ पंजों की तरह मुड़ी हुई थीं, और हवा के झोंकों में वे एक-दूसरे से टकरातीं तो ऐसा प्रतीत होता मानो हड्डियाँ चटक रही हों। कहीं-कहीं तनों से गाढ़ा, काला रस टपक रहा था, जो मिट्टी में गिरते ही धुएँ में बदल जाता।

आगे की सड़क वही थी—सीधी और अंतहीन। लेकिन अब उसमें एक भयानक आकर्षण था, मानो वह उन्हें खींचकर कहीं गहरे, अंधेरे गर्त में ले जा रही हो।

धीरे-धीरे दोनों की नज़रें विंडशील्ड से बाहर गईं। और तभी उनकी नज़रें फटी की फटी रह गयी। सड़क किनारे उनकी ही कार उलटी पड़ी थी—मरोड़ी हुई धातु, काँच की टूटी किरचें चारों ओर बिखरी हुई। हेडलाइट्स झिलमिला रही थीं, जैसे आख़िरी बार साँस ले रही हों।

लेकिन सबसे भयानक मंज़र तो अभी बाकी था। वह कार से उतरे और उन्होंने देखा की उस कार के अंदर, टूटी-फूटी सीटों के बीच, उनकी ही लाशें पड़ी हुई थी। आरव का चेहरा शीशे पर टिका हुआ, लहूलुहान। रिया की देह झुकी हुई, आँखें खुली लेकिन निर्जीव—मानो आख़िरी चीख वहीं थम गई हो।

रिया के होंठों से हल्की, टूटी हुई फुसफुसाहट निकली—

“हे भगवान…!!!

एक बर्फ़ीली सिहरन उसकी हड्डियों में उतर गई।

यह नहीं हो सकता....!!”

और तभी उन्हें सचाई का पता चला। रिया की साँसें अटक गईं। आरव की आँखों में डर से भी गहरी निराशा भर आई। भयावह अहसास ने उनकी आत्माओं को जकड़ लिया।

वे खोए नहीं थे। वे अनंत रूप से भटक नहीं रहे थे। वे मर चुके थे। दुर्घटना कोई हाल की घटना नहीं थी—यह दस साल पहले हुई थी। और तब से वे इस शापित चक्र में कैद थे, वही सड़क, वही रात, वही डर… बार-बार जीते हुए। हर बार सोचते कि शायद वे बच निकलेंगे, लेकिन हर बार उसी अंधेरे अंत में लौट आते।

कोई रास्ता नहीं था। कोई अंत नहीं था।

वे हमेशा इसी अनंत मार्ग पर बंधे रहेंगे—अपनी मौत को बार-बार जीते हुए, जीवन और मृत्यु की दहलीज़ पर कैद होकर।

और तभी, इंजन अपने आप गरज उठा। स्टीयरिंग हिलने लगा, जैसे किसी अदृश्य हाथ ने उसे पकड़ लिया हो। रिया और आरव ने काँपते हुए आख़िरी बार एक-दूसरे की आँखों में देखा—उस निगाह में डर, दर्द और अनंत यातना थी। 

फिर कार आगे बढ़ी। सड़क फिर से फैली—अपरिवर्तित, अनंत, अंधेरे में निगलती हुई। 

इस बार, उनकी परछाइयाँ कार की खिड़कियों में नहीं, बल्कि पीछे छूटते जंगलों में झिलमिलाने लगीं—लंबी, विकृत, और मुस्कुराती हुई।

अब यह साफ था—उनके लिए कोई मुक्ति नहीं थी। यह सड़क उनकी कब्र थी, और यह सफर उनका शाश्वत दंड।

सफर फिर से शुरू हो गया, और वह कभी ख़त्म नहीं होगा....!


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